एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के फ़ाइनल में भारत ने एक गोल से पिछड़ने के बाद ज़ोरदार वापसी करते हुए जापान को 4-1 से हराया। दूसरे हाफ़ में लाकड़ा, दिलप्रीत सिंह, जुगराज सिंह और विवेक सागर प्रसाद ने गोल दागे। मेज़बान भारत ने रिकॉर्ड छठी बार और लगातार तीसरी बार यह ख़िताब जीता।
मोहाली, भारत: फ़ाइनल का रुख़ पलटने के लिए जापान को बस एक मौके की ज़रूरत थी, और तीसरे मिनट में काज़ुमासा मात्सुमोतो ने उसे भुना लिया। इसके बाद भारत 39 मिनट तक जवाब नहीं दे सका, लेकिन फिर 12 मिनट के भीतर चार गोल ठोक दिए।
मात्सुमोतो ने दिलाई जापान को बढ़त
मात्सुमोतो ने बाईं ओर गेंद छीनी, उसे लेकर सर्कल में घुसे और रिवर्स हिट से भारतीय गोलकीपर को छकाते हुए गेंद नेट में डाल दी। पहले हाफ़ का यही इकलौता गोल रहा, और जो टूर्नामेंट जापान ने कभी नहीं जीता था, उसके फ़ाइनल में वह एक गोल की बढ़त लेकर ब्रेक में गया।
मेज़बान टीम ख़िताब की प्रबल दावेदार के रूप में फ़ाइनल में उतरी थी। उसने लीग चरण के सभी पांच मैच जीते थे, जिनमें ग्रुप चरण में जापान पर 4-1 की जीत भी शामिल थी, और सेमीफ़ाइनल में उसने दक्षिण कोरिया को 8-1 से रौंदा था। लेकिन फ़ाइनल में भारत के मौके बेकार जाते रहे और शुरुआत में हरमनप्रीत सिंह के पेनल्टी कॉर्नर पर लगाए गए शॉट रोक लिए गए।
लाकड़ा ने बराबरी दिलाई, दिलप्रीत ने पलटा मैच
गतिरोध 42वें मिनट में टूटा। पेनल्टी कॉर्नर पर हरमनप्रीत का एक और शॉट रोक लिया गया, लेकिन नज़दीक खड़े शिलानंद लाकड़ा ने आदित्य लालगे के पास पर गोल करके स्कोर 1-1 कर दिया।
छह मिनट बाद भारत आगे हो चुका था। हार्दिक सिंह ने मूव बनाया और 48वें मिनट में दिलप्रीत सिंह ने उसे गोल में बदल दिया। इस फ़ील्ड गोल ने फ़ाइनल का पलड़ा निर्णायक रूप से मेज़बान टीम की ओर झुका दिया।
जुगराज और प्रसाद ने लगाई जीत पर मुहर
तीसरा गोल उसी सेट पीस से आया, जिसका भारत इंतज़ार कर रहा था। 53वें मिनट में जुगराज सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर पर ड्रैग-फ़्लिक से गोल करके स्कोर 3-1 कर दिया।
चौथा गोल एक मिनट के भीतर ही आ गया। जापान के गोलकीपर ने लाकड़ा का शॉट रोक दिया, लेकिन रिबाउंड विवेक सागर प्रसाद के पास पहुंचा, जिन्होंने 54वें मिनट में गेंद नेट में पहुंचा दी। आख़िरी सेकंडों में जापान को एक पेनल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन वह उसे गोल में नहीं बदल सका।
रिकॉर्ड छठा ख़िताब
यह भारत का छठा एशियन चैंपियंस ट्रॉफी ख़िताब है। इससे भारत ने 2011, 2016, 2018, 2023 और 2024 की जीत के बाद अपना ही रिकॉर्ड और बेहतर किया। यह लगातार तीसरा ख़िताब भी है, और यह ऐसे अभियान के अंत में आया जिसमें भारत ने अपने सभी सात मैच जीते।
जापान के लिए फ़ाइनल का अंत एक बार फिर निराशा के साथ हुआ। वह अब भी यह ख़िताब नहीं जीत पाया है, और शुरुआती मिनटों में जिस उलटफेर की झलक उसने दिखाई थी, उसे अंजाम तक नहीं पहुंचा सका।
नतीजा (एशियन चैंपियंस ट्रॉफी फ़ाइनल, ओलंपियन बलबीर सिंह सीनियर अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम, मोहाली, 5 नवंबर 2026): भारत 4 (शिलानंद लाकड़ा 42′, दिलप्रीत सिंह 48′, जुगराज सिंह 53′, विवेक सागर प्रसाद 54′) ने जापान 1 (काज़ुमासा मात्सुमोतो 3′) को हराया। हाफ़-टाइम: जापान 1-0 से आगे।



